दोहे / डॉ. संजय आर्य
भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी पद पर कार्यरत डॉ. संजय आर्य के दोहे और कविताएँ सामाजिक सरोकार वाली
भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी पद पर कार्यरत डॉ. संजय आर्य के दोहे और कविताएँ सामाजिक सरोकार वाली
“अब क्लॉड की हिम्मत जवाब दे चुकी है। उसने तो सिर्फ़ चंद देशों की जंगों का जायज़ा लिया है। अभी
आज विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए थोड़े बदलाव के साथ जवरीमल्ल पारख का यह आलेख। इसका यह बलाघात
प्रखर अध्येता और समाजवैज्ञानिक कमल नयन चौबे ने टॉम बॉटमोर द्वारा संपादित ए डिक्शनरी ऑफ़ मार्क्सिस्ट थॉट का हिंदी अनुवाद
‘आदिम पुरखा कब गाँव के लोगों के रास्ते का अड़ंगा बन गया, उसे भी नहीं मालूम’… रवि यादव की कविता स्मृति,
प्रताप दीक्षित के नवीनतम कहानी संग्रह ‘कगार के आख़िरी सिरे पर’ की समीक्षा कर रहे हैं माधव महेश. ‘उम्मीद पर
इस बार ‘ऊंचाई की नोक से आसमान में ख़त लिखते पहाड़ों को’ निहारनेवाले श्री कृष्ण नीरज की कविताएँ : 1.
“मैं जीवन भर यह अनुसंधान करता रहा हूँ कि किस प्रकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फ़िल्मों की परंपरा और उनके विकास