नया पथ
July 22, 2025
एक ख़ाली दोपहर / ज्ञानचन्द बागड़ी
‘शांता देवी अब उत्तरों की प्रतीक्षा नहीं करतीं। उन्हें अब केवल अपनी बात कहनी होती है—चाहे कोई सुने या न
‘शांता देवी अब उत्तरों की प्रतीक्षा नहीं करतीं। उन्हें अब केवल अपनी बात कहनी होती है—चाहे कोई सुने या न