नया पथ
August 6, 2025
चार कविताएँ / प्रदीप्त प्रीत
‘लोकतंत्र में लोक को तिज़ोरी और पेटी में क़ैद करना किसी कला से कम नहीं है।’–प्रदीप्त प्रीत की कविताएँ :
‘लोकतंत्र में लोक को तिज़ोरी और पेटी में क़ैद करना किसी कला से कम नहीं है।’–प्रदीप्त प्रीत की कविताएँ :