नया पथ
February 1, 2026
आठ कविताएँ / राकेश वत्स
“कवि कोढ़ी होते हैं—/ कोई उन्हें छूना नहीं चाहता/ सिर्फ़ कोढ़ी ही कोढ़ियों को देखते हैं/ एक-दूसरे के ज़ख्मों के
“कवि कोढ़ी होते हैं—/ कोई उन्हें छूना नहीं चाहता/ सिर्फ़ कोढ़ी ही कोढ़ियों को देखते हैं/ एक-दूसरे के ज़ख्मों के