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सत्येंद्र कुमार

नया पथ August 6, 2025

तीन कविताएँ / सत्येंद्र कुमार

‘वे फिलिस्तीनी बच्चे हैं/ खुशियाँ बची रहें पृथ्वी पर/ वे इसके लिए लड़ रहे हैं/ वे फूलों की तरह कोमल

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