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नयी दृष्टि के आलोक में ‘हिंदुस्तानी सिनेमा और संगीत’ / अश्विनी सिंह

‘लेखक सिनेमा को सिर्फ़ मनोरंजन का ज़रिया नहीं बल्कि उसे अपने समय और समाज का

अजनबी ख़ुदा से एक मुलाक़ात… कैफ़ी आज़मी / कला कौशल

कला कौशल की किताब ‘फ़ेसबुक तुक’ हाल ही में प्रकाशित हुई है। संस्मरण और समीक्षा

आपातकाल : घोषित और अघोषित के बीच / मज़्कूर आलम

 26 जून 1975 की सुबह जिस आपातकाल की घोषणा की गयी, उसका दुहराव न हो,

पांच कविताएं / माधव महेश

हमारे समय के एक सजग युवा की चिंताएं, अवसाद और खुशियां माधव महेश की कविताओं

दलित कविता में सौन्दर्यबोध और सौन्दर्यशास्त्र / जगदीश पंकज

चंचल चौहान की किताब साहित्य का दलित सौंदर्यशास्त्र पर जनवादी लेखक संघ और दलित लेखक

नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल : संभावना, संशय और संघर्ष / जवरीमल्ल पारख

“2024 के चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने जिस तरह सांप्रदायिक

तरसेम गुजराल का कथालोचन / चंचल चौहान

“हर रचनाकार अपनी ‘वस्तु’ का चुनाव अपनी संवेदनक्षमता के आधार पर करता है, तो आलोचक

अज्ञान और अविवेक का विजय-पर्व? / जवरीमल्ल पारख

आधुनिकता को पश्चिम की वर्चस्वकारी परियोजना बताने वालों ने जब उसके एक स्तंभ के रूप

हिंदू बहुसंख्यकवाद के ख़तरों और चुनौतियों की शिनाख्त़ करती एक ज़रूरी किताब / संजीव कुमार

अपनी किताब के आमुख में परकाला प्रभाकर कहते हैं, ‘निकट भविष्य में एक चुनावी जीत