‘वन्दे मातरम’ के आईने में राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और वर्तमान भारत का पारिस्थितिक आत्मपरीक्षण / डॉ. सुमन पाण्डेय
भारत-माता की कल्पना भारतीय राष्ट्रवाद की सबसे प्रभावशाली और साथ ही सबसे जटिल सांस्कृतिक निर्मितियों में से एक है। भारत
भारत-माता की कल्पना भारतीय राष्ट्रवाद की सबसे प्रभावशाली और साथ ही सबसे जटिल सांस्कृतिक निर्मितियों में से एक है। भारत
न्याय रहित अदालती फ़ैसला आख़िरकार ग्यारह साल बाद अदालत किसी नतीजे तक पहुँची। नतीजा अप्रत्याशित नहीं था। जाति आधारित हिंसा
‘जिस किसी ने भी स्वतंत्रता संग्राम का अध्ययन किया है, वह जानता है कि हिंदुत्व संगठनों, विशेषकर आरएसएस के लिए
अगर सर्दी आती है, तो क्या बसंत दूर हो सकता है? (If Winter Comes, Can Spring Be Far Behind’ –
रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने गुलाबी शहर जयपुर में एक हाथी को गुलाबी रंग में रंगने का प्रयोग किया। ऐसा
1967 से इज़रायल के क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी हिस्सों में मानवाधिकारों की स्थिति की जो तस्वीर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक
“भारतीय संविधान के मूल में यह मान्यता थी कि भारत विभिन्न राष्ट्रीयताओं का संघ है क्योंकि भारत विभिन्न भाषाओं, क्षेत्रीय
19-21 सितंबर को बाँदा में हुए जलेस के ग्यारहवें राष्ट्रीय सम्मेलन में कुल दस प्रस्ताव रखे गये और मामूली संशोधनों
जनवादी लेखक संघ के ग्यारहवें राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्र की रिपोर्ट का जो मसौदा पेश किया गया, उस पर बहस