एक शहर, एक क़स्बा : 70 के दशक की कुछ यादें / संजीव कुमार
चार-पाँच साल पहले एक मित्र ने योजना बनायी कि कुछ लोगों के दस वर्ष की उम्र तक के संस्मरणों की
चार-पाँच साल पहले एक मित्र ने योजना बनायी कि कुछ लोगों के दस वर्ष की उम्र तक के संस्मरणों की
“मैं किस बात पर बोलता हूं, किस बात पर चुप रहता हूं। किस बात पर क़दम आगे बढ़ाता हूं, किस
बिहार का बेगूसराय ज़िला, जो 1972 से पहले मुंगेर ज़िले के अंतर्गत एक सब-डिविशन था, की ख्याति बिहार के लेनिनग्राद
‘रूपाली दत्ता और अन्य कविताएँ’ लिखने वाली शानदार कवि ज्योति शोभा का यह यात्रा-संस्मरण जितना दिलचस्प है, उतना ही बहसतलब
‘विचारधारा और चर्बी, दोनों का यही सिद्धांत है— अवसर देखकर घटाओ, ज़रूरत पड़ने पर बढ़ाओ।’–प्रधानमंत्री के भाषण और कुछ पाला
‘जब मैं कहूँ कि शेक्सपीयर एक कहानी है जो भुला दी गयी है, कि अब वह किसी को याद नहीं
शंकर दयाल सिंह (1937–1995) एक प्रखर कांग्रेस नेता, विद्वान स्तंभकार और हिंदी के सजग प्रहरी थे। 33 वर्ष की आयु
1965 के भारत-पाक युद्ध में इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नॉलजी के साथ आज की स्थितियों की तुलना नहीं हो सकती,
‘इस तरह के दंगों या सांप्रदायिक हिंसा के भड़कने के बाद अक्सर पूछा जाता है कि हिंसा की शुरुआत किसने