‘स्टालिनग्राद’ : इतिहास की विराटता के बीच मनुष्य की खोज / महेश मिश्र
‘दोस्तोएव्स्की मनुष्य की आत्मा के भीतर उतरते हैं। ग्रॉसमैन उसी आत्मा को इतिहास, राज्य, युद्ध और विचारधारा के दबाव के
‘दोस्तोएव्स्की मनुष्य की आत्मा के भीतर उतरते हैं। ग्रॉसमैन उसी आत्मा को इतिहास, राज्य, युद्ध और विचारधारा के दबाव के
रांची के 18 प्रखंडों के सरकारी विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों के वर्षों से लंबित रिक्त पद आज झारखंड में
[यह The Unheard Voice की तरफ़ से 20 अगस्त 2026 को Youtube पर आयोजित चर्चा का लिप्यंकन है। तेरह साल
दलित स्त्री कविता का स्वर भिन्न तरीके से प्रश्नवाची रहा है। इस स्वर ने दलितवादी प्रश्नवाचकता को बहुआयामी बनाया है।
“बात दृष्टि के कोण की नहीं, पूरी दृष्टि की है। मेरी नज़र में उनकी दृष्टि द्वेषपूर्ण है। देखिए, द्वेष का
‘मणि कौल के लिए साहित्यिक कृति फिल्म निर्माण के लिए कच्चे माल की तरह नहीं थी। साहित्यिक कृति पर फिल्म
भारत-माता की कल्पना भारतीय राष्ट्रवाद की सबसे प्रभावशाली और साथ ही सबसे जटिल सांस्कृतिक निर्मितियों में से एक है। भारत
न्याय रहित अदालती फ़ैसला आख़िरकार ग्यारह साल बाद अदालत किसी नतीजे तक पहुँची। नतीजा अप्रत्याशित नहीं था। जाति आधारित हिंसा
समकालीन साहित्य में कविता केवल सौंदर्यशास्त्रीय उपभोग की वस्तु न होकर अपने समय के सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ, अधिनायकवादी रुझानों और मानवीय