शुद्धिकरण में निर्वस्त्र न्याय / ज्ञानचन्द बागड़ी
नया पथ में ज्ञानचन्द बागड़ी की कहानी ‘एक खाली दुपहर’ बहुत पसंद की गई थी। ‘शुद्धिकरण में निर्वस्त्र न्याय’ उससे
नया पथ में ज्ञानचन्द बागड़ी की कहानी ‘एक खाली दुपहर’ बहुत पसंद की गई थी। ‘शुद्धिकरण में निर्वस्त्र न्याय’ उससे
अखिलेश सिंह की इस छोटी-सी कहानी में आप जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, कथाभाषा अधिक परिपक्व-चुहलबाज़ होती जाती है और कथा-स्थितियाँ
“अब क्लॉड की हिम्मत जवाब दे चुकी है। उसने तो सिर्फ़ चंद देशों की जंगों का जायज़ा लिया है। अभी
विष्णु नागर की यह छोटी-सी कहानी हमारे समय पर एक गहरी टिप्पणी है। वे ब्योरों के नहीं, निचोड़ के उस्ताद
बसंत त्रिपाठी की यह पूर्व-प्रकाशित कहानी ख़ुद ‘कहानी’ के बारे में है। और जितना यह ‘कहानी’ के बारे में है,
‘शांता देवी अब उत्तरों की प्रतीक्षा नहीं करतीं। उन्हें अब केवल अपनी बात कहनी होती है—चाहे कोई सुने या न
स्त्री-पुरुष के बीच मित्रता का संबंध इतना असंभव-सा क्यों है?–कोई 70-75 साल पहले इस समस्या को केंद्र में रखकर मुक्तिबोध
घर की सारी घड़ियों के बंद पड़े होने की समस्या के साथ पति-पत्नी में बातों का जो सिलसिला शुरू होता
क्या कोई ऐसी कहानी हो सकती है जिसमें घटनाएँ नदारद हों, फिर भी आपको एक क़ायदे की शुरुआत मिले और