उपासना गौतम की कविताएँ / प्रस्तुति : बजरंग बिहारी तिवारी
दलित स्त्री कविता का स्वर भिन्न तरीके से प्रश्नवाची रहा है। इस स्वर ने दलितवादी प्रश्नवाचकता को बहुआयामी बनाया है।
दलित स्त्री कविता का स्वर भिन्न तरीके से प्रश्नवाची रहा है। इस स्वर ने दलितवादी प्रश्नवाचकता को बहुआयामी बनाया है।
हमारे दौर में न्याय-व्यवस्था का जो हश्र हुआ है, उसे इस दौर के विशिष्ट कवि हरीश चन्द्र पाण्डे की यह
सुमित की कविताएँ सुमित अपने कवि-कर्म को लेकर गंभीर हैं यद्यपि उनकी काव्ययात्रा आरंभ हुए ज़्यादा दिन नहीं हुए हैं।
प्रकाश चंद्रायन को ‘नया पथ’ के प्रिंट संस्करण से लेकर ऑनलाइन तक आप पहले से पढ़ते आये हैं। उनका एक
नया पथ में इस बार वरिष्ठ और सुपरिचित कवि अनिल गंगल की कविताएँ। भविष्य के लिए, स्वाद, एक टिटिहरी की
दलित कविता प्रश्नवाची तेवर के कारण विशेष रूप से पहचानी गई। जैसे-जैसे उसका विकास होता गया, प्रश्नों की रंगत बदलती
राम निहोर तिवारी के नवगीत प्रकृति की सुंदरता से लेकर व्यवस्था की कमियों तक, कितनी ही चीज़ों पर बहुत सहज-स्वाभाविक
राकेश वत्स इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में लगभग डेढ़ दशक तक हिंदी के अध्यापक रहने के बाद पिछले दो
28 फरवरी को, ईरान पर अमरीकी-इस्राइली हमले की शुरुआत होने के कुछ ही घंटों के भीतर, दक्षिणी ईरान के मीनाब