रचना

‘जब घर में बेटा आया, आयशा ने ही उसका नाम कबीर रखने का सुझाव दिया। एक नाम, जो मुसलमानों-हिन्दुओं में

सीमा सिंह की कविताएं ‘इस हिंदू होते समय’ का प्रति-आख्यान हैं। यहां स्त्रियों के मंगलसूत्र की चिंता करते प्रधानमंत्री के

सरगर्मी

लखनऊ के सामाजिक संगठनों, महिला, छात्र व नौजवान संगठनों सहित लेखकों व संस्कृतिकर्मियों ने अंबेडकर विश्वविद्यालय में, प्रशासन से बातचीत

विचार

‘सचाई तो यह है कि 1970 के दशक तक दुनिया के स्तर पर ही स्त्री कलाकारों के पर्याप्त नामलेवा नहीं

2007 की ‘एडवोकेट’ पर, दस्तावेज़ी फ़िल्मों के बारे में अपनी जानकारी को अद्यतन रखनेवाले संजय जोशी की टिप्पणी:  —————————————————————- दक्षिण

जवरीमल्‍ल ‍पारख की किताब ‘साहित्‍य कला और सिनेमा’ पर हरियश राय की संक्षिप्‍त टीप  ——————————————————————– साहित्‍य, कला और सिनेमा जवरीमल्‍ल

अस्मिता

विगत 32 वर्षों से मानव-शास्त्र और समाज-शास्त्र के अध्ययन और अध्यापन में लगे ज्ञान चंद बागड़ी इन दिनों आदिवासी इलाक़ों

चंचल चौहान की पुस्तक, ‘साहित्य का दलित सौंदर्यशास्त्र’ राधाकृष्ण प्रकाशन से हाल ही में प्रकाशित हुई है। भूमिका, उपसंहार और

‘सचाई तो यह है कि 1970 के दशक तक दुनिया के स्तर पर ही स्त्री कलाकारों के पर्याप्त नामलेवा नहीं

देशकाल

“भारतीय जनसंघ को जनता पार्टी में शामिल करने के ख़तरे की ओर न केवल किसी ने ध्यान नहीं दिया बल्कि

“भारत की मूलभूत संकल्पना में संघात्मकता अंतर्निहित है और उसे एक राष्ट्र के रूप में कल्पित नहीं किया गया है

एक जागरूक और विचारवान राष्ट्र ही लोकतंत्र की रक्षा कर सकता है। क्या भारत के पास अपने लोकतंत्र को बचाने

आलोचना

20 अप्रैल 2024 से आलोचक और जनवादी लेखक संघ के संस्थापक महासचिव चंद्रबली सिंह का जन्मशती वर्ष आरंभ हुआ है।

9-10 सितंबर, 2023 को इलाहाबाद में प्रलेस, जलेस और जसम के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित ‘शेखर जोशी स्मृति आयोजन’ के

हरिशंकर परसाई की जन्मशती बीतते-बीतते उनकी मृत्यु के लगभग 30 वर्ष पूरे हो जायेंगे। 1995 में उनकी मृत्यु हुई थी