मार्क्सवादी अन्तश्चेतना की आत्मिक अभिव्‍यक्ति : कविवर रामेश्वर प्रशांत के गीत, ग़ज़ल एवं मुक्तक / प्रो. राजेन्‍द्र साह

‘रामेश्वर प्रशांत की कविताओं में प्रकृति की कठोरता चित्रित है तो प्राकृतिक उपादानों के माध्यम से दुराचारियों-अत्याचारियों की करतूतों का

समकालीन हिंदी कहानी में पूंजीवादी विकास की आलोचना / संदर्भ: हरित साहित्य / संजीव कुमार

2022 में हरित साहित्य/ग्रीन लिटरेचर पर केंद्रित एक ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में इस विषय पर बोलने का मौक़ा मिला