आन्ना करेनिना : एक आत्मीय पढ़त / महेश मिश्र
‘तोलस्तोय पतित स्त्री के चरित्र को ध्यान में रखकर यह उपन्यास लिखना शुरू करते हैं, पर आन्ना का चरित्र जिस
‘तोलस्तोय पतित स्त्री के चरित्र को ध्यान में रखकर यह उपन्यास लिखना शुरू करते हैं, पर आन्ना का चरित्र जिस
बजरंग बिहारी तिवारी के इस सुदीर्घ लेख के पांचवें भाग में : राजकमल चौधरी, परमानन्द श्रीवास्तव, विजेंद्र, कुमार विकल और
लगता है, लंबे समय तक सिर्फ़ पढ़ाई में लगे रहने के बाद महेश मिश्र दुबारा लिखाई में लौटे हैं। नया
‘बनास जन’ से साभार लिया गया यह लेख राकेश बिहारी के आलोचक और कथाकार रूप का फ्यूज़न है. यहाँ वे
‘समकालीन हिंदी कविता के परिदृश्य में स्त्री-अस्तित्व और उसकी चेतना का स्वर केवल पारंपरिक रूढ़ियों के विरोध तक सीमित नहीं
‘प्रगतिशील काव्यधारा में दलित स्त्री’ बजरंग बिहारी तिवारी का सुदीर्घ आलेख है जिसके 7 भाग लिखे जा चुके हैं और आगे के
‘प्रगतिशील काव्यधारा में दलित स्त्री’ बजरंग बिहारी तिवारी का सुदीर्घ आलेख है जिसके 7 भाग लिखे जा चुके हैं और आगे के
‘प्रगतिशील काव्यधारा में दलित स्त्री’ बजरंग बिहारी तिवारी का सुदीर्घ आलेख है जिसके 7 भाग लिखे जा चुके हैं और आगे के
‘प्रगतिशील काव्यधारा में दलित स्त्री’ बजरंग बिहारी तिवारी का सुदीर्घ आलेख है जिसके 7 भाग लिखे जा चुके हैं और