सत्य के अन्वेषी और ‘अंधेरे की आदत’ वाला समाज / सुभाष गाताडे
अगर सर्दी आती है, तो क्या बसंत दूर हो सकता है? (If Winter Comes, Can Spring Be Far Behind’ –
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राकेश वत्स इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में लगभग डेढ़ दशक तक हिंदी के अध्यापक रहने के बाद पिछले दो
‘मैरी रॉय के बहाने अरुंधती ने बार बार खुद से मिलवाया है।’ —मदर मैरी कम्स टू मी को पढ़ने के बाद
रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने गुलाबी शहर जयपुर में एक हाथी को गुलाबी रंग में रंगने का प्रयोग किया। ऐसा
गुजरात लॉ सोसाइटी यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद की फैकल्टी ऑफ़ डिज़ाइन में असिस्टंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत सुमन पांडेय का यह
1967 से इज़रायल के क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी हिस्सों में मानवाधिकारों की स्थिति की जो तस्वीर संयुक्त राष्ट्र की विशेष प्रतिवेदक
28 फरवरी को, ईरान पर अमरीकी-इस्राइली हमले की शुरुआत होने के कुछ ही घंटों के भीतर, दक्षिणी ईरान के मीनाब
‘दुनिया जिन हस्तियों की तरफ़ बड़ी उम्मीद से देखती थी, वे एप्सटीन गांव के निवासी निकले।… इस विलेज ने पूरी
‘आज हम औपनिवेशिक ग़ुलामी के एक नये दौर में प्रवेश कर चुके हैं। यह ग़ुलामी केवल अमरीका की नहीं है