क्रांति, स्मृति और आत्म-पहचान के बीच: वर्तमान में ‘परसेपोलिस’ की प्रासंगिकता / डॉ सुमन पाण्डेय

विगत 4 जून 2026 को ईरान की मशहूर लेखिका, चित्रकार और लोकतान्त्रिक आंदोलनों की मुखर हिमायती मरजाने सतरापी का इंतकाल

अनुपस्थिति का भूगोल, स्थायित्व का विघटन: केशव तिवारी की कविता ‘पता पूछते’ / रवि रंजन

अनुपस्थिति का भूगोल, स्थायित्व का विघटन : केशव तिवारी की ‘पता पूछते’ कविता में उत्तर-औपनिवेशिक संवेदना ‘पहली दृष्टि में यह

उमैरा अहमद और स्त्रियों के रोज़मर्रा को स्वर देती कहानियाँ / अदिति भारद्वाज

‘उमैरा अहमद के लेखन में सामाजिक जटिलताओं में, नैतिक दुविधाओं में फँसी वे तमाम स्त्रियाँ हैं जो चुपचाप हर दिन