क्रांति, स्मृति और आत्म-पहचान के बीच: वर्तमान में ‘परसेपोलिस’ की प्रासंगिकता / डॉ सुमन पाण्डेय
विगत 4 जून 2026 को ईरान की मशहूर लेखिका, चित्रकार और लोकतान्त्रिक आंदोलनों की मुखर हिमायती मरजाने सतरापी का इंतकाल
विगत 4 जून 2026 को ईरान की मशहूर लेखिका, चित्रकार और लोकतान्त्रिक आंदोलनों की मुखर हिमायती मरजाने सतरापी का इंतकाल
अनुपस्थिति का भूगोल, स्थायित्व का विघटन : केशव तिवारी की ‘पता पूछते’ कविता में उत्तर-औपनिवेशिक संवेदना ‘पहली दृष्टि में यह
“यह संग्रह उस समय में है जब मनुष्य और प्रकृति के बीच का संबंध तेज़ी से टूट रहा है और
‘मैरी रॉय के बहाने अरुंधती ने बार बार खुद से मिलवाया है।’ —मदर मैरी कम्स टू मी को पढ़ने के बाद
आज विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए थोड़े बदलाव के साथ जवरीमल्ल पारख का यह आलेख। इसका यह बलाघात
कथाकार अमरकांत के इस जन्मशती वर्ष में आप पहले ‘ज़िंदगी और जोंक’ पर चंचल चौहान का लेख पढ़ चुके हैं।
‘एक भ्रांति है कि किसी नामचीन आलोचक के फ़तवे से कोई कहानी महान हो सकती है। वह कालजयी तो अपनी
‘द बुक थीफ़ ‘ को अक्सर ‘एक युद्ध में फँसी बच्ची की कहानी’ समझा जाता है, लेकिन यह भाषा की
इसे सचमुच लेख नहीं, मसौदा ही समझिए! मसौदे को सुझावों-संशोधनों के लिए सार्वजनिक किया जाता है। यहाँ भी उद्देश्य वही