तरक़्क़ी पसंद तहरीक– जब इज़हार-ए-ख़याल की आज़ादी ने कई सरहदों को तोड़ा था / समीना ख़ान

‘समाज की तश्कील-ए-नौ (नया आकार देना) एक मंसूबे पर मुन्हसिर है और इसके लिए एक तंज़ीम की ज़रूरत है।’– तरक़्क़ी