रांची के 18 प्रखंडों के सरकारी विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों के वर्षों से लंबित रिक्त पद
आज झारखंड में उर्दू साहित्य प्रतिभा के अभाव से नहीं, बल्कि संस्थागत समर्थन के अभाव से अधिक जूझ रहा है। झारखंड बनने के बाद सबसे अधिक प्रभावित उर्दू भाषा हुई. इसे दूसरी सरकारी भाषा का दर्जा 26 साल पूर्व मिल चुका है परंतु क्रियान्वयन ना होने के कारण उर्दू को हाशिए की ज़बान बना दिया गया. दो दशकों से अधिक समय से सरकारी विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई जिसका सबसे ज़्यादा नुक़सान उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थियों का हुआ और अब तक हो रहा है.
कई सरकारी विद्यालयों में 1977, 2010, 2011, 2012, 2014, 2018 से उर्दू शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं और बहुत से ऐसे भी विद्यालय हैं जहां आरंभिक काल से स्वीकृत उर्दू शिक्षकों के पदों को भरने का प्रयास नहीं किया गया. कई विद्यालय ऐसे भी हैं जहां उर्दू पढ़ने वालों की संख्या 200 और उससे अधिक है, पर उर्दू पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं है .
बुढ़मू उर्दू स्कूल में 415 उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थी हैं जहां स्वीकृत उर्दू शिक्षकों के पद 9 हैं और उनमें 8 पद वर्ष 1996, 2013, 2016 और 2023 से रिक्त हैं.
उर्दू विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में पढ़ने के बुनियादी अधिकार से रांची सहित झारखंड के अन्य ज़िलों में वंचित किया जा रहा है. ये संवैधानिक प्रावधानों के अनुच्छेद 350( A), 19( 1)(a) एवं 29( 2)( f) के विरुद्ध है जो प्रारंभिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देने पर बल देता है.
विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों के पदों की कमी, उच्च शिक्षा में उर्दू के प्रति घटती रुचि, विश्वविद्यालयों में उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थियों की घटती संख्या, विश्विद्यालय में दोषपूर्ण शोध कार्य/प्रक्रिया, विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रशिक्षित एवं योग्य उर्दू शिक्षकों का अभाव, नीड बेस्ड टीचर और गेस्ट टीचर की नियुक्ति से पठन-पाठन का प्रभावित होना, पाठ्यक्रम में उर्दू पुस्तकों की अनुपलब्धता जैसे गंभीर प्रश्न हैं जिन पर विचार किए जाने की आवश्यकता है.
उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन की दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. उर्दू अकादमी की स्थापना, प्रत्येक जिले में उर्दू प्रकोष्ठ (उर्दू सेल), उर्दू शिक्षकों के रिक्त पदों को भरना, अनुवाद केंद्र स्थापित करना, ज़िलों में अनुवादक की नियुक्ति सुनिश्चित करना और महाविद्यालयों में उर्दू पुस्तकालयों को मज़बूत करना–ऐसे महत्त्वपूर्ण क़दम इस दिशा में उठाए जा सकते हैं।
झारखंड बने हुए लगभग 26 साल हो गए लेकिन उर्दू की सूरत-ए-हाल में कोई ख़ास बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है. सरकारी विद्यालयों में उर्दू के सैंकड़ों पद रिक्त पड़े है लेकिन वर्षों से नियुक्ति प्रक्रियाएं लंबित है. बिहार से हस्तांतरित उर्दू शिक्षकों के 4401 में से मात्र 800 पदों की नियुक्ति प्रक्रिया पर कार्यवाही की शुरुआत हुई है.

आर टी आई के माध्यम से प्राप्त सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के स्वीकृत एवं रिक्त पद:
a) रांची जिला के शिक्षक अधिकारी( DSE) से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत 227 राजकीय एवं राज्यकृत स्कूलों से प्राप्त सूचना के अनुसार उर्दू की स्थिति बहुत भयावह और चिंताजनक है. रांची सहित 18 ब्लॉकों में से 6 ब्लॉक का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया जा रहा है जिससे स्थिति स्पष्ट हो जाएगी:
i) रांची : रांची ब्लॉक के 2 दर्जन से अधिक विद्यालयों में 56 उर्दू शिक्षकों के पद आरंभिक काल से स्वीकृत हैं.
स्वीकृत पद -56,रिक्त पद – 34, कार्यरत उर्दू शिक्षक – 22.
a)जी एम एस हिंदपीढ़ी उर्दू स्कूल : इस स्कूल में उर्दू पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 425 है, उर्दू शिक्षकों के स्वीकृत पद – 7, कार्यरत शिक्षक – 3, रिक्त पद – 4.
b) जे पी एस भिट्ठा: जीपी एस उर्दू चंदवे : उर्दू विद्यार्थी 57, स्वीकृत पद- 1,रिक्त पद – 1.
c)जी एम एस चर्च रोड: उर्दू विद्यार्थी -121, स्वीकृत पद: 1.
d)जी एम एस आदर्श कोका( konka )कन्या: स्वीकृत पद -3, रिक्त – 2.
e) जीपीएस पुरानी रांची कन्या : स्वीकृत पद 1,रिक्त 1.
f )जी एम एस पहाड़ी टोला : स्वीकृत: 3, रिक्त : 1.
g) जी एम एस कांटाटोली: स्वीकृत: 2, रिक्त: 2.
इन विद्यालयों में दशकों से रिक्त पद भरे नहीं गए जिसके कारण उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थियों का नुकसान हो रहा है.
ii) मांडर ब्लॉक : मांडर ब्लॉक के स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के 43 पद स्वीकृत हैं जिनमें 9 पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं और मांडर प्रखंड में उर्दू शिक्षकों के 34 पद दशकों से रिक्त हैं.
a)रा उर्दू प्रा वि ब्रांबे : स्वीकृत पद – 3, रिक्त – 2, वर्ष 2010 से.
b)प्रा वि चिगड़ी: उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या 28 है परंतु उर्दू शिक्षक का पद स्वीकृत नहीं किया गया है.
c )रा उर्दू प्रा वि कंभीथा: विद्यार्थी( उर्दू) – 143,स्वीकृत- पद: 4,कार्यरत- 2,रिक्त: 2 ,वर्ष 2012 से पद रिक्त है.
d ) रा उ म वि उर्दू गोरे: उर्दू विद्यार्थी: 110,स्वीकृत पद: 2,रिक्त पद: 1 वर्ष 2012 से रिक्त है.
e)रा उ म वि प्रयोगों: उर्दू विद्यार्थी: 103, स्वीकृत पद: 1,रिक्त पद: 1 आरंभिक काल से रिक्त है.
f) रा उ म वि उर्दू लोयो: विद्यार्थी: 124, स्वीकृत पद: 2,रिक्त पद: 2 वर्ष 2012 से रिक्त है.
g)रा उ म वि उर्दू मसमानो: विद्यार्थी: 79,स्वीकृत: 1,रिक्त: 1 वर्ष 2011 से रिक्त है.
h)रा उ म वि उर्दू सकरा: विद्यार्थी:64,स्वीकृत:1,रिक्त: 1.
i )यू पी जी प्रा वि हूहूटोली: विद्यार्थी: 43, उर्दू शिक्षक का कोई पद स्वीकृत नहीं है.
j)यू पी जी प्रा वि लोयो पिपरटोली: विद्यार्थी: 104, उर्दू शिक्षकों का कोई पद आरंभिक काल से स्वीकृत नहीं है.
k)रा कृ उ म वि मंदरो : स्वीकृत पद: 1 रिक्त: 1 उर्दू का कोई भी विद्यार्थी नहीं है.
l )रा कृ उ म वि बंझीला : स्वीकृत: 1,रिक्त: 1, विद्यार्थी: 94.
m) नव प्रा वि बखार: विद्यार्थी : 112, उर्दू का कोई भी पद स्वीकृत नहीं किया गया है.
n)नव प्रा वि चरकी: विद्यार्थी :शून्य, स्वीकृत पद: शून्य कार्यरत उर्दू शिक्षक: 1.
o)रा म वि बोबरो:विद्यार्थी: 86,स्वीकृत: 2,रिक्त: 2, शुरू से.
p)रा म वि ब्रांबे :विद्यार्थी: 24, स्वीकृत पद: शून्य.
q)रा म वि चुंद:विद्यार्थी : शून्य,स्वीकृत: 1, रिक्त: 1.
r)रा म वि कंदरी:विद्यार्थी: 53,स्वीकृत: 1,रिक्त: 1 शुरू से.
s)रा म वि करगे:विद्यार्थी: 72, स्वीकृत : 2,रिक्त: 2 शुरू से.
t )रा म वि मांडर:विद्यार्थी: 126, स्वीकृत : 3,रिक्त: 2 जनवरी 2026 से रिक्त है.
u)रा म वि सोसई आश्रम:विद्यार्थी: शून्य, स्वीकृत : 1,रिक्त:1.
v) रा म वि टांगर बसली:विद्यार्थी: 120, स्वीकृत : 2,रिक्त: 1.
w)रा म वि तिगोई अम्बाटोली:विद्यार्थी: 72, स्वीकृत : 2,रिक्त: 2 शुरू से.
x) रा प्रा वि बहेरा टोली उर्दू:विद्यार्थी: 110, स्वीकृत : 1.
y) रा प्रा वि बिसहाखटंगा: विद्यार्थी : 67,स्वीकृत पद: 1,रिक्त:1, शुरू से रिक्त है.
iii) नगड़ी ब्लॉक : स्वीकृत पद- 4,रिक्त पद: 4, वर्ष 2017 से रिक्त.
b)रा कृ म वि नगड़ी: विद्यार्थी – 197, स्वीकृत पद: 2,
रिक्त पद: 2.
c)रा कृ उर्दू म वि मठटोली:विद्यार्थी – 192,स्वीकृत – 2, रिक्त पद – 1, वर्ष 2017 से रिक्त है.
iv) चाहो (chanho):
a)रा म वि बलसोखरा: विद्यार्थी – 177,स्वीकृत पद – 4,रिक्त पद – 3, वर्ष 2024 से रिक्त.
b)रा म वि बयासी : विद्यार्थी – 99,स्वीकृत पद – 1,रिक्त पद – 1, वर्ष 2014 से रिक्त.
c) रा उर्दू उ वि चाहो: विद्यार्थी – 140,स्वीकृत पद -1,रिक्त- 1 वर्ष 2014 से रिक्त.
d)रा उर्दू उ वि सोस: विद्यार्थी – 180,स्वीकृत पद- 3,रिक्त पद- 1,वर्ष 2014 से रिक्त.
e) रा प्रा वि चटकल: विद्यार्थी – 78, स्वीकृत – 2,रिक्त – 1.
f)रा उर्दू म वि चौड़ा: विद्यार्थी – 39,स्वीकृत – 1,रिक्त – 1.
g)रा म वि चोरिया: विद्यार्थी – 40, स्वीकृत पद – 3,रिक्त – 3…वर्ष 2014 से पद रिक्त है.
h)रा उ म वि गणेशपुर: विद्यार्थी – 7,स्वीकृत – 1,रिक्त – 1.
i) रा म वि लुंडरी : विद्यार्थी – 159, स्वीकृत – 2,रिक्त – 2.
j) रा उ म वि मेलानी : विद्यार्थी -59, स्वीकृत -1,रिक्त – 1.
k) रा उ म वि पंडरी ( उर्दू): विद्यार्थी – 241, स्वीकृत पद – 2 रिक्त पद – 2, वर्ष 2014 से रिक्त.
l)रा उ मवि सिलगाई:विद्यार्थी -134,स्वीकृत -1,रिक्त – 1.
m) रा उ म वि तरंगा:विद्यार्थी -86,स्वीकृत .1,रिक्त – 1.
v) रातू ब्लॉक :
a) रा प्रा वि पुंदाग: विद्यार्थी – 35, स्वीकृत – 2,रिक्त – 1.
b)रा प्रावि उर्दू फुटकल टोली: विद्यार्थी -437,स्वीकृत – 1 c)रा उत्क्रमित म वि बानापीडी :विद्यार्थी:50,स्वीकृत-3,
रिक्त पद- 1 वर्ष 2018 से रिक्त.
vi) ओरमांझी :
a)रा उत्क्रमित म वि कुटे उर्दू: स्वीकृत पद – 5,रिक्त – 4.
b)रा प्रा वि इरबा: स्वीकृत पद – 1, रिक्त पद – 1.
vii) बुढ़मू :
a) उर्दू स्कूल बुढ़मू : विद्यार्थी – 415, स्वीकृत पद – 9,रिक्त पद – 8, वर्ष 1996,2013,2016 और 2023 से उर्दू शिक्षकों के पद रिक्त हैं .
इसके अलावा Bero, लापुंग, बुंडू, ब्लॉक से भी सूचना प्राप्त हुई है.
कुछ विद्यालयों में 1977 से उर्दू शिक्षकों के पद रिक्त चले आ रहे हैं और इन रिक्त पदों को ना तो भरने का प्रयास किया गया और ना उन विद्यालयों से उर्दू शिक्षकों के स्वीकृत पदों को divert किया गया जहां उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या शून्य है.
हमारे संगठन का 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल इन मुद्दों विशेषकर सरकारी विद्यालयों में उर्दू शिक्षकों के खाली पदों को भरे जाने सहित अन्य मुद्दों को लेकर माननीय मुख्यमंत्री,झारखंड से 29 अगस्त 2025 को प्रोजेक्ट भवन में मिला था और ज्ञापन सौंपा गया था. उन्होंने डेलीगेशन को आश्वस्त किया था कि सरकार उर्दू को लेकर गंभीर है और शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेगी. अभी तक इंतज़ार है.
2. विश्वविद्यालय/ महाविद्यालयों में उर्दू की स्थिति और भी चिंताजनक है।
a) महाविद्यालयों में उर्दू शिक्षकों के रिक्त पद :
–रांची विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में 5 स्वीकृत उर्दू शिक्षकों के विरुद्ध मात्र 2 शिक्षक कार्यरत हैं. यहां विद्यार्थियों की संख्या लगभग 100 है.
–डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में मात्र एक नियमित उर्दू शिक्षक सहित 3 नीड बेस्ड टीचर कार्यरत हैं. यहां विद्यार्थियों की लगभग 200 है.
–डोरंडा कॉलेज : विद्यार्थी – 178,स्वीकृत पद – 2, रिक्त – 2, गेस्ट टीचर – 2.
–मारवाड़ी कॉलेज : स्वीकृत – 2,रिक्त – 2, विद्यार्थी – 200, कार्यरत गेस्ट टीचर – 2.
–मारवाड़ी विमेन कॉलेज : विद्यार्थी – 150, स्वीकृत पद – 2, कार्यरत गेस्ट टीचर – 2
–एस एस मेमोरियल : विद्यार्थी – 89, स्वीकृत पद – 2, रिक्त – 2, नीड बेस्ड टीचर 1.
–रांची विमेन कॉलेज में स्वीकृत पदों के विरुद्ध एक भी नियमित उर्दू अध्यापक पदस्थापित नहीं है. इस कॉलेज में स्वीकृत एवं रिक्त पदों की संख्या 2 है. इस कॉलेज में contractual और need based टीचर से काम लिया जा रहा है.
–राम लखन सिंह यादव और जे एन कॉलेज में मात्र एक नियमित उर्दू अध्यापक पदस्थापित है.
–जे एन कॉलेज धुर्वा से आर टी आई के माध्यम से प्राप्त सूचना के अनुसार तीनों सेमेस्टर में विद्यार्थियों की संख्या एक दर्जन (15) से कुछ अधिक है. इस कॉलेज में एक नियमित उर्दू अध्यापक और एक need based टीचर कार्यरत हैं.
प्रति माह रांची यूनिवर्सिटी उर्दू विभाग के इन दो शिक्षकों की सैलरी पर एक दर्जन विद्यार्थियों की पढ़ाई पर डेढ़ से दो लाख खर्च करती है जो प्रति विद्यार्थी लगभग 17 हज़ार आता है.
उर्दू विभाग रांची विश्वविद्यालय :
a ) उर्दू विभाग, रांची विश्वविद्यालय से सूचना अधिकार अधिनियम के तहत उर्दू के ताल्लुक़ से 7 बिंदुओं पर 14 जून 2025 को सूचना उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था. उक्त आवेदन में उर्दू विभाग में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या, सेमेस्टरवार उपस्थिति, परीक्षा में विद्यार्थियों को sent-up किए जाने के नियम, पी .एच.डी. शोधार्थियों एवं उनके गाइड, पिछले दस वर्षों में उर्दू भाषा एवं साहित्य से संबंधित शोध कार्य, विभाग में नियमित शिक्षकों की संख्या एवं उनकी उपस्थिति, उर्दू पुस्तकों की खरीद एवं प्रकाशन, सेमिनार, विभागीय पुस्तकालय तथा अन्य संबंधित अभिलेखों से जुड़े कुल 7 प्रमुख बिंदुओं में सूचनाएँ मांगी गई थीं जो 6 माह के बाद जन सूचना अधिकारी रांची यूनिवर्सिटी के माध्यम से 8. 12. 2025 को भेजी गई.
उक्त सूचना इनके पत्रांक आर टी आई/ 100/ 2025 दिनांक 8. 12. 2025 एवं उर्दू विभाग के पत्रांक 230/ PG/URD/11/ 25 दिनांक 29. 11. 2025 से प्राप्त हुई. उर्दू विभाग के उक्त पत्रांक जिसे जन सूचना अधिकारी रांची यूनिवर्सिटी ने endorse किया है, के अनुसार आर टी आई की धारा 2( f), 6( 1) एवं धारा 7( a) का हवाला देते हुए सूचना उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया और कुछ अनावश्यक टिप्पणियां भी दी गईं जैसे ₹10 में 22 प्रश्न के जवाब नहीं दिए जा सकते, ये प्रश्न बोझिल, असंगत और परेशान करने वाले हैं, यूनिवर्सिटी के कार्यकलाप में हस्तक्षेप ,व्यवधान और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना बताया गया.
b) जवाब से असंतुष्ट होने के पश्चात प्रथम अपीलीय अधिकारी, रांची यूनिवर्सिटी को 24. 12.2025 को पुनः स्पीड पोस्ट संख्या EJ335018447IN के माध्यम से अपील दायर की गई जो 2.1. 2026 को डिलीवर की गई.
c) प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा 30/ 45 के अंदर अपील dispose नहीं की गई तो दूसरी अपील दिनांक 9. 5. 2026 सूचना आयोग को स्पीड पोस्ट संख्या EJ 369232872IN दिनांक 11.5. 2026 के माध्यम से भेजी गई जिसका निष्पादन अब तक नहीं किया गया है.
d) डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की भी ऐसी ही स्थिति है. उर्दू विभाग ने आर टी आई के माध्यम से मांगी गई सूचना देने से इनकार ही नहीं किया बल्कि भ्रामक एवं झूठी सूचना उपलब्ध कराई जिसके विरुद्ध अपील दायर की गई है.








झारखंड में उर्दू ज़बान की अकादमिक स्थिति का बहुत ही विस्तार से जायज़ा लिया गया है, पाठशालाओं से लेकर महा विद्यालयों तक उर्दू पढ़ाने वाले शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं की गई है। यह स्थिति बड़ी अफसोसनाक है। उम्मीद है तथ्यों पर आधारित इस रिपोर्ट का सरकार ज़रूर संज्ञान लेगी।