चिर निर्वासन से जूझते हुए : इन अदर वर्ड्स / अदिति भारद्वाज
‘भाषा के साथ इस अद्भुत तादात्म्य को दस्तावेज़ के रूप में दर्ज करती ‘इन अदर वर्ड्स’ भाषा के साथ होने
‘भाषा के साथ इस अद्भुत तादात्म्य को दस्तावेज़ के रूप में दर्ज करती ‘इन अदर वर्ड्स’ भाषा के साथ होने
भाषा का मसला पहले से भी, और इन दिनों विशेष रूप से, विवादों में रहा है। हमें कैसी हिंदी चाहिए,
“स्योहारवी ने रूढ़िवादी माने जाने वाले संस्थान से होकर भी आधुनिकता के साथ संवाद स्थापित किया और पाकिस्तान आंदोलन की
“कोई भी पलटकर पूछ सकता है कि हम अभी तक कौन-से स्वर्ग में रह रहे थे जिसको बचाने की फ़िक्र
पत्रिकाओं में छप तो बहुत कुछ रहा है, पर क्या वह सब पढ़ा भी जा रहा है? विचार कर रहे
नात्सी अत्याचार का भयावह दौर… अपने बेटे से दूर नात्सियों के यातना शिविर में फँसी अन्ना सेम्योनोव्ना… शिविर के अँधेरे
कुछ लोगों की राय है कि दमन के दौर लेखन को व्यंजना शक्ति की ओर अधिकाधिक उन्मुख करते हैं और
‘इतिहास में अधीनस्थ होने का अर्थ मूक होना या अशक्त होना नहीं है। संघर्ष हुआ है, इसे स्वीकार करने की
सुभाष राय की किताब ‘अक्क महादेवी’ की यह छोटी और सघन समीक्षा डॉ. रूपा सिंह ने की है जिन्हें हम