द ब्रदर्स कारमाज़ोव : आत्म की गहन पड़ताल और मानवीय गरिमा का महाकाव्य / महेश मिश्र
लगता है, लंबे समय तक सिर्फ़ पढ़ाई में लगे रहने के बाद महेश मिश्र दुबारा लिखाई में लौटे हैं। नया
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‘बनास जन’ से साभार लिया गया यह लेख राकेश बिहारी के आलोचक और कथाकार रूप का फ्यूज़न है. यहाँ वे
‘समकालीन हिंदी कविता के परिदृश्य में स्त्री-अस्तित्व और उसकी चेतना का स्वर केवल पारंपरिक रूढ़ियों के विरोध तक सीमित नहीं
‘प्रगतिशील काव्यधारा में दलित स्त्री’ बजरंग बिहारी तिवारी का सुदीर्घ आलेख है जिसके 7 भाग लिखे जा चुके हैं और आगे के
कवि के रूप में शालिनी सिंह और सीमा सिंह से नया पथ के पाठकों का पुराना परिचय है। यहाँ सीमा
‘प्रगतिशील काव्यधारा में दलित स्त्री’ बजरंग बिहारी तिवारी का सुदीर्घ आलेख है जिसके 7 भाग लिखे जा चुके हैं और आगे के
विजय राही के संग्रह दूर से दिख जाती है बारिश पर प्रेमचंद गांधी की ज़रूरी टिप्पणी। युवा कवि विजय राही
‘प्रगतिशील काव्यधारा में दलित स्त्री’ बजरंग बिहारी तिवारी का सुदीर्घ आलेख है जिसके 7 भाग लिखे जा चुके हैं और
दलित कविता प्रश्नवाची तेवर के कारण विशेष रूप से पहचानी गई। जैसे-जैसे उसका विकास होता गया, प्रश्नों की रंगत बदलती