राकेश वत्स इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में लगभग डेढ़ दशक तक हिंदी के अध्यापक रहने के बाद पिछले दो दशकों से चीन के बीजिंग इंटरनेशनल स्टडीज़ यूनिवर्सिटी में काम कर रहे हैं। हिंदी और अंग्रेजी में कविताएँ लिखते हैं।

मुझे सब से लोकप्रिय नेता पसंद है
T.V- 9 स्टूडियो में
एक जानी-मानी बोल्ड एक्ट्रेस जो अपने दिल की बात खुलकर कहती हैं
पांच संपादकों के पैनल और एंकर का सामना कर रही थीं।
रैपिड-फायर सेगमेंट में,
एंकर ने सब से लोकप्रिय नेता उर्फ़ स्व-घोषित विश्वगुरु
और विपक्ष के नेता
की तस्वीरें बड़ी स्क्रीन पर साथ-साथ दिखाईं
और पूछा,
आपको इन में से कौन पसंद है?
एंकर के पलक झपकने से पहले ही अभिनेत्री ने जवाब देते हुए कहा ,
‘मुझे सब से लोकप्रिय नेता पसंद है’
अभिनेत्री की आवाज़ पूरे स्टूडियो में गूंज गई,
और हर उस ड्राइंग रूम में
जहां कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा जा रहा था।
इतनी तेज़ी से अभिनेत्री ने जवाब दिया कि
स्टूडियो के दर्शक भी हैरान थे ।
पांचों संपादक और एंकर ने राहत की साँस ली।
पहाड़ी मशरूम का सूप पीते हुए,
लोकप्रिय नेता उर्फ़ स्व-घोषित विश्वगुरु मुस्कुराए
और उन्हें अपने अजैविक होने का पक्का यकीन हो गया।
सूप बहुत स्वादिष्ट था।
द फाइल्स सीरीज़ के निर्माता, निर्देशक ने सोचा,
‘ओह ! मुझे आज शाम उसे फ़ोन कर के
अपनी अगली फ़िल्म —
‘बंगाल फाइल्स’ के लिए साइन करना चाहिये ।
मशहूर विकेश अभिनेता ने भी उसे देखा
और मुस्कुराया ,
स्मार्ट लड़की है।
वाई -प्लस सिक्योरिटी कवर वाली एक्ट्रेस ने एक शैतान मुस्कान के साथ रिएक्ट किया:
“आह, बी-ग्रेड,
दिल्ली सी एम का पद हथियाने की सोच रही है”
नागपुर के नभ में भी यह विचार गूँजा …
‘दमदार नेत्री है’
पल भर में
अभिनेत्री की पहुँच उल्का-पिंड की गति से
सत्ता के गलियारों में छा गई।
अभिनेत्री के यह कहने के बाद कि
‘मुझे सब से लोकप्रिय नेता पसंद हैं’ तीन सेकंड का मौन था,
भाषा और साहित्य के आचार्यों को
मौन और इसके महत्व का
अच्छी तरह से गहन अध्ययन करना चाहिए।
अज्ञेय का कहना है ,
कविता मौन में ही होती है।
महाभारत युद्ध में,
युधिष्ठिर के ‘अश्वत्थामा हतोहता…’ कहने के बाद जो मौन था ,
उस के बाद उन्होंने जो कहा ,
द्रोणाचार्य ने नहीं सुना।
और युद्ध ने एक अलग मोड़ ले लिया।
लेकिन हर मौन की महत्ता और महिमा नहीं होती।
पूर्व प्रधानमंत्रियों में से एक का भाषण
लंबी मौन श्रृंखला से भरा होता था —
लेकिन वह सिर्फ़ मौन था
अभिधा वाला मौन।
तीन सेकंड बाद,
अभिनेत्री ने कहा:
‘मुझे इसी देश में रहना है’
इस वाक्य ने
सब कुछ पूरी तरह उलट-पलट दिया ।
फाइल्स सीरीज़ निर्माता, निर्देशक
जिसने अभी-अभी उन्हें साइन करने के बारे में सोचा था
ने अपना विचार छोड़ दिया।
अभिनेत्री की उल्कापिंड की गति से मिली उदीयमान स्थिति
ताश के पत्तों के महल की तरह ढह गई।
CBI, ED के ऑफिस में लगातार फ़ोन
बजने लगे
और फिर अचानक बंद भी हो गए।
लोकप्रिय नेता उर्फ़ स्व-घोषित विश्वगुरु ने अपना मशरूम सूप खत्म कर लिया था।
लेकिन अब उन्हें अपनी जीभ पर खटास महसूस हो रही थी।
विकेश एक्टर ने टीवी बंद कर दिया।
Y- प्लस सिक्योरिटी वाली एक्ट्रेस ने कहा:
“उह्ह, B-ग्रेड।”
एंकर को समझ नहीं आया
कि उसने गोल किया है
या सेल्फ गोल।
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फ़रवरी की कविताएँ
फ़रवरी में ऐसा क्या खास है
कि इतने सारे कवि इसके बारे में लिख रहे हैं —
एक, दो, तीन नहीं,
बल्कि ढेरों, फ़रवरी पर अनगिनत कविताएँ।
इसकी हवा, इसका मौसम, इसकी धूप,
इसका पल भर का रोमांस —
ये सब उनकी कविताओं में झूम रहे हैं।
सबसे छोटा महीना। वह महीना जो आपसे कुछ नहीं माँगता।
क्या वे नंगी आँखों से देखने से डरते हैं ?
क्या वे रात भर जागते हुए सोते हैं, अपराध-बोध से भरे हुए,
फ़रवरी की रेत में अपना सिर गड़ाए हुए ?
वे किसी राजा की पूजा नहीं करते, न ही कुबेर से धन की याचना करते हैं ,
न किसी ऊँचे पद की लालसा, न ही बचाव करने वाली किसी सत्ता की जी हुज़ूरी ।
फिर भी वे डरते हैं
अपनी ही चुप्पी से ….
क्योंकि चुप्पी को ‘जानना’ समझा जा सकता है,
उनके दिलों में पनप रही ‘साजिश’ जैसा।
इसलिए वे बोलते हैं, मेंढकों की तरह,
बार-बार दोहराते हुए:
फ़रवरी , फ़रवरी , फ़रवरी ।
उन्हें लगता है कि इस तरह वे अपने को बेगुनाह साबित कर सकते हैं,
फ़रवरी के राग के पीछे छिपकर।
लेकिन — और यह एक बहुत बड़ा ‘लेकिन’ है —
तब क्या होगा
जब उनकी कविताएँ, उनके गीत, उनके शब्द,
यहाँ तक कि उनके मस्तिष्क
बारीकी से जाँचे जाएँगे, सूचीबद्ध किए जाएँगे, और तौले जाएँगे?
क्या वे चिह्नित नहीं होंगे ?
एल्गोरिथम के जाल में फँसे हुए!
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अत्यंत प्रशंसनीय कविताएँ
स्तरीय रचनायें!!व्यंग्य सारगर्भित है!!भाषा सरल और सहज है और सच बेलाग है!!सराहनीय कार्य किया है राकेश!!
Good job done Rakesh. Very meaningful poems and truthful aswell.
तीखा व्यंग्य,गहरा सच आपकी रचनाओं को विशिष्ट पहचान देता है!!सारगर्भित कविताओं की रचना की है राकेश!!गर्व है आप पर 👍🏻
पहली कविता अच्छी है। वर्तमान भारतीय राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा कटाक्ष।
शब्दों द्वारा मौन साकार हुआ है
बहुत ही बढ़िया