छह कविताएँ / रवि यादव
‘आदिम पुरखा कब गाँव के लोगों के रास्ते का अड़ंगा बन गया, उसे भी नहीं मालूम’… रवि यादव की कविता स्मृति,
‘आदिम पुरखा कब गाँव के लोगों के रास्ते का अड़ंगा बन गया, उसे भी नहीं मालूम’… रवि यादव की कविता स्मृति,
इस बार ‘ऊंचाई की नोक से आसमान में ख़त लिखते पहाड़ों को’ निहारनेवाले श्री कृष्ण नीरज की कविताएँ : 1.
विभिन्न माध्यमों में लगातार प्रकाशित होनेवाले कवि प्रदीप मिश्र परमाणु ऊर्जा विभाग के राजा रामान्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र, इंदौर में
इस बार रोहतक में रहनेवाली मनजीत मानवी की कविताएँ। प्रखर सामाजिक-राजनीतिक चेतना से संपन्न, स्त्रीवादी कार्यकर्ता मनजीत रोहतक के महर्षि
‘रूपाली दत्ता और अन्य कविताएँ’ लिखने वाली शानदार कवि ज्योति शोभा का यह यात्रा-संस्मरण जितना दिलचस्प है, उतना ही बहसतलब
आभा खरे स्वतंत्र लेखन करती हैं। न्यूयॉर्क में स्थित भारतीय कौंसलवास से निकलने वाली वैश्विक हिन्दी पत्रिका ‘अनन्य’ में संपादन सहयोग
संजय कुंदन का यह नाटक मौजूदा दौर पर एक तीखा व्यंग्य है। इतना तीखा कि एकाधिक जगहों पर छपते-छपते रह
विष्णु नागर की यह छोटी-सी कहानी हमारे समय पर एक गहरी टिप्पणी है। वे ब्योरों के नहीं, निचोड़ के उस्ताद
‘व्याकुल मन को जीतकर/ इच्छाशक्ति से नव निर्माण के लिए/ सब तोड़ती हुई स्त्री के पास मेरा/ सर्वकालिक ठिकाना है’–इस