जब दीवारें गिरायी जा रही थीं / वेद प्रकाश
तानाशाह अपनी मुस्कान बिखेर रहा था मूंछें होतीं तो तन गयी होतीं पेंट कमीज़ पहन रहा होता तो उसकी मसकें
तानाशाह अपनी मुस्कान बिखेर रहा था मूंछें होतीं तो तन गयी होतीं पेंट कमीज़ पहन रहा होता तो उसकी मसकें
2022 में प्रकाशित राकेश बिहारी की कहानी ‘फांसी’ संभवतः मृत्युदंड से संबंधित बहस को संबोधित करती हिंदी की अकेली कहानी
नियंत्रण जो समझता है आपकी भाषा वही आपके नियंत्रण में आता है चींटी नहीं समझती मनुष्य की भाषा इसलिए वह
केशव तिवारी के प्रकाश्य संग्रह नदी का मर्सिया तो पानी ही गायेगा से सात कविताएं —————————————————————————– कवि कविता से कुछ
साहित्य का एक काम ताक़तवर आख्यानों के सामने प्रति-आख्यान रख देना है। संदीप मील की यह कहानी मौजूदा ‘अयोध्या -कांड
अदनान कफ़ील दरवेश की कविताएं हमारे समय के बारे में कवि की बेहद व्याकुल और आविष्ट प्रतिक्रियाएं हैं। जिन ‘फिल्मों,
1 कवन सपेरा बीन बजावै न्याव, प्रसासन, बिधि-बिधायिका : सबका नाच नचावै जाति-धरम चिनगी परचावै, धूं-धूं लपट उठावै बेकारन क
1 माधौ! असंसदीय मत बोलो। भजन-कीर्तन जाप करौ जब, राम कहे मुंह खोलो।। जुबां-केसरी फांक के, सच बोलै से पहिले