पाँच नवगीत / राम निहोर तिवारी
राम निहोर तिवारी के नवगीत प्रकृति की सुंदरता से लेकर व्यवस्था की कमियों तक, कितनी ही चीज़ों पर बहुत सहज-स्वाभाविक
राम निहोर तिवारी के नवगीत प्रकृति की सुंदरता से लेकर व्यवस्था की कमियों तक, कितनी ही चीज़ों पर बहुत सहज-स्वाभाविक
राकेश वत्स इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में लगभग डेढ़ दशक तक हिंदी के अध्यापक रहने के बाद पिछले दो
28 फरवरी को, ईरान पर अमरीकी-इस्राइली हमले की शुरुआत होने के कुछ ही घंटों के भीतर, दक्षिणी ईरान के मीनाब
बिहार का बेगूसराय ज़िला, जो 1972 से पहले मुंगेर ज़िले के अंतर्गत एक सब-डिविशन था, की ख्याति बिहार के लेनिनग्राद
नया पथ में ज्ञानचन्द बागड़ी की कहानी ‘एक खाली दुपहर’ बहुत पसंद की गई थी। ‘शुद्धिकरण में निर्वस्त्र न्याय’ उससे
अखिलेश सिंह की इस छोटी-सी कहानी में आप जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, कथाभाषा अधिक परिपक्व-चुहलबाज़ होती जाती है और कथा-स्थितियाँ
“कवि कोढ़ी होते हैं—/ कोई उन्हें छूना नहीं चाहता/ सिर्फ़ कोढ़ी ही कोढ़ियों को देखते हैं/ एक-दूसरे के ज़ख्मों के
भारतीय जीवन बीमा निगम में विकास अधिकारी पद पर कार्यरत डॉ. संजय आर्य के दोहे और कविताएँ सामाजिक सरोकार वाली
“अब क्लॉड की हिम्मत जवाब दे चुकी है। उसने तो सिर्फ़ चंद देशों की जंगों का जायज़ा लिया है। अभी