हरदेवी – एक ‘लॉस्ट हीर’ / चारु सिंह
‘इतिहास में अधीनस्थ होने का अर्थ मूक होना या अशक्त होना नहीं है। संघर्ष हुआ है, इसे स्वीकार करने की
‘इतिहास में अधीनस्थ होने का अर्थ मूक होना या अशक्त होना नहीं है। संघर्ष हुआ है, इसे स्वीकार करने की
सुभाष राय की किताब ‘अक्क महादेवी’ की यह छोटी और सघन समीक्षा डॉ. रूपा सिंह ने की है जिन्हें हम
‘ ‘द कॉन्ट्रैक्ट्स ऑफ फ़िक्शन’ हमें याद दिलाती है कि साहित्य एक गहरा अभ्यास है जिसके सहारे हम अपने नैतिक
‘अच्छे साहित्य की एक पहचान यह भी होती है कि वह हमारी चेतना को उन्नत करता है और परम्परागत प्रगति-विरोधी
“जर्मनी में नाज़ी शासन के दौरान लगातार मज़बूत और अमानवीय होती गयी इस परिघटना की भाव-भूमि को समझने के लिए
‘नेहरू केवल भाषणों में ही महान नहीं थे—उनके कर्म उनके शब्दों से एक क़दम आगे रहते थे। उन्होंने पहले आम
यह आलेख बताता है कि 1996 में प्रकाशित एक किताब किस तरह होलोकॉस्ट के संदर्भ में आम जर्मन की भूमिका
‘यह पुस्तक आसान भाषा में पश्चिमी और भारतीय स्त्री विमर्श का सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्ष प्रस्तुत करती है।’–डॉ. रमा नवले
‘बाद में आने वाले लोगों के लिए रास्ता आसान न भी सही पर अनचीन्हा-अनजाना नहीं रह जाता, पर जिन्होंने सबसे