अंतराल / अखिलेश सिंह
अखिलेश सिंह की इस छोटी-सी कहानी में आप जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, कथाभाषा अधिक परिपक्व-चुहलबाज़ होती जाती है और कथा-स्थितियाँ
अखिलेश सिंह की इस छोटी-सी कहानी में आप जैसे-जैसे आगे बढ़ते हैं, कथाभाषा अधिक परिपक्व-चुहलबाज़ होती जाती है और कथा-स्थितियाँ
“कवि कोढ़ी होते हैं—/ कोई उन्हें छूना नहीं चाहता/ सिर्फ़ कोढ़ी ही कोढ़ियों को देखते हैं/ एक-दूसरे के ज़ख्मों के
“सत्य का सम्यक स्वरूप वह है जिसके केन्द्र में तथ्य या प्रमाण नहीं, बल्कि मनुष्य की अंतर्निहित संवेदना और अस्तित्व
“अब क्लॉड की हिम्मत जवाब दे चुकी है। उसने तो सिर्फ़ चंद देशों की जंगों का जायज़ा लिया है। अभी
आज विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए थोड़े बदलाव के साथ जवरीमल्ल पारख का यह आलेख। इसका यह बलाघात
प्रखर अध्येता और समाजवैज्ञानिक कमल नयन चौबे ने टॉम बॉटमोर द्वारा संपादित ए डिक्शनरी ऑफ़ मार्क्सिस्ट थॉट का हिंदी अनुवाद
‘आदिम पुरखा कब गाँव के लोगों के रास्ते का अड़ंगा बन गया, उसे भी नहीं मालूम’… रवि यादव की कविता स्मृति,
प्रताप दीक्षित के नवीनतम कहानी संग्रह ‘कगार के आख़िरी सिरे पर’ की समीक्षा कर रहे हैं माधव महेश. ‘उम्मीद पर
इस बार ‘ऊंचाई की नोक से आसमान में ख़त लिखते पहाड़ों को’ निहारनेवाले श्री कृष्ण नीरज की कविताएँ : 1.