“हूबनाथ पाण्डेय की कविताएँ ‘वर्गबोध’ की कविताएँ हैं”- प्रो. बजरंग बिहारी / जनवादी लेखक संघ, मुंबई
18 अगस्त 2024 को मुंबई विश्वविद्यालय में ‘राजनीतिक कविता की परंपरा व भूमिका’ विषय पर प्रोफ़ेसर हूबनाथ पांडेय की कविताओं
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जनवादी लेखक संघ लखनऊ द्वारा 15 अगस्त को समीना ख़ान की कहानी ‘बयाज़’ का पाठ रखा गया। इस वर्ष समीना
संविधान के जिस अनुच्छेद 370 के ज़रिये जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था, वह आज
‘दमनकारी अंग्रेज़ शासक और उनके मुस्लिम लीगी प्यादों के बारे में तो सच्चाईयां जगज़ाहिर हैं, लेकिन अगस्त क्रांति के हिंदुत्ववादी
सन 2000 में इन पंक्तियों के लेखक ने अपने बचपन के मुहल्ले में एक सिनेमा हॉल के बनने और बंद
किसी एक तरह की कट्टरता पर बात करने वाली रचना सभी तरह की कट्टरताओं के खिलाफ़ एक वक्तव्य बन जाती
‘महाराज’ फिल्म पर जवरीमल्ल पारख के विस्तृत आलेख का दूसरा भाग : ————————————————————— महाराज : अतीत में वर्तमान महाराज एक
14 जुलाई 2024 को साथी कांतिमोहन ‘सोज़’ हमारे बीच नहीं रहे। जनवादी लेखक संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक,
उन्नीसवीं सदी के लगभग मध्य का महाराजा लाइबेल केस यों तो भली-भांति दस्तावेज़ीकृत है, पर इतिहास का सामान्य ज्ञान रखने