छह कविताएं / अदनान कफ़ील दरवेश
अदनान कफ़ील दरवेश की कविताएं हमारे समय के बारे में कवि की बेहद व्याकुल और आविष्ट प्रतिक्रियाएं हैं। जिन ‘फिल्मों,
अदनान कफ़ील दरवेश की कविताएं हमारे समय के बारे में कवि की बेहद व्याकुल और आविष्ट प्रतिक्रियाएं हैं। जिन ‘फिल्मों,
कला-संस्थानों में खुले नज़रिये को हतोत्साह किया जाने लगा है। आस्था आहत हो जाने के हवाले से कला-परिसरों में हुड़दंगियों
तार सप्तक की कहानी में कई उतार-चढ़ाव आते रहे। छपने के बाद कुछ विवाद हुए, कुछ दावे-प्रतिदावे सामने आये। आपसी
राष्ट्रीय अपराध रिपोर्ट ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि साल-दर-साल जाति आधारित हिंसा में कमी आने के स्थान पर
जितने क़ानूनी और सामाजिक अधिकार स्त्री को अब तक मिले, वे सब साझा प्रयासों का फल हैं जिनका उद्देश्य है
जबसे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है, हिंदू राष्ट्र बनाने के अपने लक्ष्य की
आरएसएस की मूल अवधारणा ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ एक ऐसी निरंकुश सामाजिक सत्ता की कल्पना है जो हर तरह की असमानता और
आज़ाद भारत के साढ़े सात दशक के सफ़र की दिशा-दशा को समझने के प्रयास में, देश के जाने-माने अर्थशास्त्री और
आज़ादी के बाद के भारत के सामाजिक यथार्थ को समझने के लिए उस पहले सवाल से फिर जूझना ही पड़ेगा