क्या सामान्य नागरिक भी अकल्पनीय क्रूरता के वाहक बन सकते हैं? / महेश मिश्र
यह आलेख बताता है कि 1996 में प्रकाशित एक किताब किस तरह होलोकॉस्ट के संदर्भ में आम जर्मन की भूमिका
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मुख़्तार ख़ान का यह लेख जितना उर्दू क़वायद के बारे में है, उतना ही हिंदी-उर्दू के अटूट रिश्ते के बारे
22 जनवरी 2025 को दिल्ली की एक अदालत ने विख्यात भारतीय चित्रकार, स्मृतिशेष मक़बूल फ़िदा हुसेन के दो चित्रों को
दस्तावेज़ी फ़िल्मकार, बेहतरीन फ़िल्म संपादक और कवि तरुण भारतीय हमारे बीच नहीं रहे। दो दिन पहले दिल का दौरा पड़ने
‘यह पुस्तक आसान भाषा में पश्चिमी और भारतीय स्त्री विमर्श का सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्ष प्रस्तुत करती है।’–डॉ. रमा नवले
‘बाद में आने वाले लोगों के लिए रास्ता आसान न भी सही पर अनचीन्हा-अनजाना नहीं रह जाता, पर जिन्होंने सबसे
हिन्दी सिनेमा के निर्माता, निर्देशक और अभिनेता राज कपूर का जन्म 14 दिसम्बर, 1924 को पेशावर (अब पाकिस्तान में) में
हिन्दी सिनेमा की प्रख्यात अभिनेत्री शबाना आज़मी से यह बातचीत मार्च 2003 में की गयी थी। पिछले दिनों पुराने कागज-पत्र
23 दिसम्बर को श्याम बेनेगल के इंतकाल के साथ हिंदी और भारतीय सिनेमा के एक युग का अवसान हो गया