छह कविताएँ : बसंत त्रिपाठी
बसंत त्रिपाठी की इन कविताओं में एक ओर ‘धंधेबाज़ों की चालाकियों’ के क़िस्से हैं और ‘मैं’ सर्वनाम के साथ उन
बसंत त्रिपाठी की इन कविताओं में एक ओर ‘धंधेबाज़ों की चालाकियों’ के क़िस्से हैं और ‘मैं’ सर्वनाम के साथ उन
मणि मोहन हिन्दी के जाने माने कवि और अनुवादक हैं। अभी तक छः कविता संकलन और चार अनुवाद की पुस्तकें
हरीश चन्द्र पाण्डे हमारे समय के विशिष्ट कवि हैं। लोग उनकी कविताओं का इंतज़ार करते हैं। प्रकाशित कृतियाँ हैं :
‘दिगम्बर विद्रोहिणी अक्क महादेवी’ पर एक यादगार किताब लिख चुके सुभाष राय इन दिनों आंडाल पर काम कर रहे हैं।
प्रदीप अवस्थी के पास गहरी उदासी की कविताएं हैं तो आक्रोश, संघर्ष और उम्मीद की भी। लगभग सभी महत्वपूर्ण पत्रिकाओं
पकी-पोढ़ी निगाहों से छूट जाने वाली कई चीज़ें बच्चों जैसी निश्छल निगाह की ज़द में आ जाती हैं। शचीन्द्र आर्य
2 फरवरी 1960 को हरसूद (अब जलमग्न), ज़िला खंडवा, मध्यप्रदेश में जन्मे वसंत सकरगाए के कविता-संग्रह हैं : ‘निगहबानी में
सीमा सिंह की यह कविता-शृंखला एक परिघटना को कविता में संबोधित करने का असाधारण उदाहरण है। वे ‘नया पथ’ में
अपने संवेदनशील प्रेक्षण से कई बार चौंका देने वाले संजीव कौशल छोटी कविताओं के उस्ताद हैं। अपने आसपास की अतिसाधारण